विजय चावला की रिपोर्ट
बाल विद्या मंदिर एवं रवींद्रालय ने अपने 61 वें स्थापना वर्ष पर भव्य वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ रवींद्रालय प्रेक्षागृह में संपन्न किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि थे माननीय श्री जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री महेंद्र कुमार सिंह, एमएलसी एवं पूर्व मंत्री द्वारा की गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक बाजपेई जी (शिक्षा मंत्री उ०प्र० सरकार एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य) की विशेष उपस्थिति रही। सभी अतिथियों को पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के महामंत्री एवं विद्यालय के प्रबंधक श्री राजेश सिंह जी द्वारा कार्यक्रम में स्वागत भाषण एवं बाल विद्या मंदिर व रवीन्द्रालय की विस्तृत जानकारी दी गई।

इस कार्यक्रम में मो०मेमो० सो० के सम्मानित पदाधिकारीगण एवं सदस्यगण तथा रवीन्द्रालय के अवैतनिक सचिव सुधीर हलवासिया जी एवं शहर की जानी मानी हस्तियां, विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ० आर० के० पाण्डेय एवं सभी शिक्षकगण, अन्य स्टॉफ, अभिभावकगण व छात्र उपस्थित रहे। छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ अपना योगदान दिया।
पिछले वर्षों में रवीन्द्रालय ने कला, नाटक, संगीत, गीत, नृत्य, साहित्य और लोक संस्कृति के संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान दिया। यह मंच हमेशा से कलाकारों विद्यार्थियों तथा कला प्रेमियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता रहा है।
समारोह में विद्यार्थियों ने अनेक आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।

मुख्य आकर्षण रहे :-
प्रेयर डांस (कभी राम बनके कभी श्याम बनके) प्राइमरी सेक्शन के नन्हे छात्रों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग प्रस्तुति जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सौम्य प्रारंभ दिया।
इसके बाद देश की क्रांति एवं शहीदों की शहादत को दिखाता एक हिंदी स्किट ‘क्रांति का एक दिन’ जिसमें विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम की एक झलक प्रभावशाली अभिनय के साथ प्रस्तुत की।
पूर्व छात्र एवं वर्तमान भातखण्डे विश्वविद्यालय में तबला वादक के रुप में कार्यरत तुषार सहाय का तबला वादन, जिसने अपनी लय, ताल और कौशल से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोकनृत्य / फोक डांस ऑफ इंडिया एक ऐसा कार्यक्रम जिसमें भारत में अनेकता की एकता और विविधता को न केवल दर्शाया बल्कि वहां की संस्कृति और लोक नृत्य को प्रभावशाली और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। जिसने भारत की विविध लोकसंस्कृति को रंगीन और ऊर्जावान रूप में दर्शाया।
विद्यालय के कुलगीत का प्रभावशाली गायन विद्यालय के छात्रों द्वारा किया गया।

रवीन्द्रालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब छात्रों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और समर्पण का सुंदर प्रदर्शन किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक बाजपेई जी ने अपने आशीर्वचनों से सभी को संबोधित करते हुए कहा की बाल विद्या मंदिर एक ऐसी शिक्षा की संस्था है जहां से छात्र न केवल शिक्षित होते हैं वरन सुसंस्कृत भी होते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे माननीय जयवीर सिंह जी ने अपने उद्बोधन में कहा आज इस विद्यालय के कार्यक्रम में न केवल एक सांस्कृतिक और मनमोहक प्रस्तुति दी है वरन अपनी प्रस्तुतियों से भारत की अखंडता और एकता को भी दिखाया है जो अपने आप में काबिले तारीफ है। हम हमारी परम्पराएं भले ही अलग हो पर हमारे संस्कृति एक है। हमारे नृत्य भले ही विभिन्न हो, पर हमारी आत्मा भारतीय है। भारत का हर रंग, हर राज्य एवं प्रत्येक संस्कृति इस मंच पर जीवंत हो उठी और उसके भारत की उस सांस्कृतिक विरासत को दिखाया जिसने सदियों से हमें एकता के सूत्र में बांध रखा है। यह सिर्फ एक प्रस्तुति ही नही यह भारत की अखण्डता, सद्भाव, सम्मान और एकजुटता के जीवन्त तस्वीर है।
अपने उद्बोधन में कार्यक्रम के अध्यक्ष ने विद्यालय की 61 वर्षीय उत्कृष्ट शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि “बाल विद्या मंदिर न केवल शिक्षा का केंद्र है बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को भी नई पीढ़ी में प्रस्थापित कर रहा है।” अध्यक्ष महोदय ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए विद्यालय की प्रगति की प्रशंसा की। छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा प्रतिभा को अवसर मिले तो, सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है। साथ ही जीवन में हमेशा सकारात्मक सोंच और मेहनत को अपना साथी बनायें।
रवीन्द्रालय के अवैतनिक सचिव एवं प्रशासन परिषद के सदस्य, श्री सुधीर हलवासिया जी ने अंत में समारोह में उपस्थित प्रतिभागियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यालय को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के संकल्प को दोहराया।
बाल विद्या मंदिर का 61 वाँ वार्षिकोत्सव विद्यालय की समृद्ध परंपराए अनुशासन एवं सर्वांगीण विकास का प्रेरणादायक प्रतीक रहा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान से किया गया।/











